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झूठी पुलिस रिपोर्ट लिखने से क्या होता है?

यदि किसी पुलिस अधिकारी ने झूठी एफ आई आर की रिपोर्ट दर्ज की है, तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जा सकती है। ऐसे में 6 साल की सजा ₹1000 जुर्माना अथवा दोनों ही सजा का प्रावधान है

झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने पर कौन सी धारा लगती है?

दिल्‍ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली अधिवक्‍ता शुभम भारती ने बताया कि आईपीसी की धारा 482 के तहत झूठी एफआईआर को चैलेंज किया जा सकता है. अगर आपके खिलाफ या आपके जाननेवाले के खिलाफ कोई झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है तो धारा 482 के तहत उसे हाईकोर्ट से राहत मिल सकती है.

कोई झूठा केस लगा तो क्या करें?

– किसी ने आपके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाई है तो आप धारा 482 का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस धारा के तहत वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र लगाया जा सकता है। – इस पत्र के साथ में आप अपनी बेगुनाही के सबूत भी दे सकते हैं।

जब एक झूठी प्राथमिकी आपके विरुद्ध दर्ज किए है कि क्या करना है?

किसी ने आपके खिलाफ झूठी एफआईआर करवाई है तो इस धारा का आप इस्तेमाल कर सकते हैं। इस धारा के तहत वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र लगाया जा सकता है। इस पत्र के साथ में आप अपनी बेगुनाही के सबूत भी दे सकते हैं।

फर्जी केस से कैसे बचें?

आप 482 C.R.P.C धारा की वजह से Jhuthi FIR में गिरफ़्तारी से भी बच सकते हैं। लेकिन ये याद रखे के आपको जल्द से जल्द अपनी बेगुनाही का साबुत कोर्ट में पेश करना होगा। ताकि इसका निर्णय हो सके और आप इन सब में से छूट सके।

5 मर्डर करने पर कितने साल की सजा होती है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अनुसार, जो भी कोई किसी व्यक्ति की हत्या करता है, तो उसे मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

क्या पुलिस को किसी को मारने का अधिकार है?

जी नहीं। ऐसा कोई भी अधिकार पुलिस के पास नहीं है। यदि पुलिस किसी को प्रताड़ित करती है तो वह पीड़ित माननीय न्यायालय की मदद ले सकता है। पुलिस के पास किसी भी आरोपी को मारने का कोई अधिकार नहीं है पुलिस के पास जो अधिकार होते हैं वह नागरिकों के संरक्षण के लिए होते हैं।

अपना केस खुद कैसे लड़े?

दरअसल, इसके लिए आपको जज से परमिशन लेनी जरूरी है. आप परमिशन लेने के बाद खुद के केस में पैरवी कर सकते हैं. हालांकि, जज आपको वकील नियुक्त करने का परामर्श दे सकते हैं. इसके लिए आप अपना पक्ष रख सकते हैं और कागजी कार्यवाही करने के लिए और खुद को अपना केस रिप्रेजेंट करने के लिए उचित समय मांग सकते हैं.

पुलिस को गुमराह करने पर कौन सी धारा लगती है?

आईपीसी की धारा 177 (Indian Penal Code Section 177)

भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 177 (Section 177) के तहत किसी लोक सेवक या अधिकारी को झूठी जानकारी देना एक अपराध बताया गया है.

आपको कैसे पता चलेगा कि किसी ने आपके खिलाफ केस दर्ज किया है?

यह पता लगाने के लिए कि क्या किसी ने आपके खिलाफ मुकदमा दायर किया है, अपने निवास के काउंटी में कोर्ट क्लर्क पर जाएँ । कोर्ट क्लर्क यह देखने के लिए एक रिकॉर्ड खोज कर सकता है कि क्या आपके पास कोई मुकदमा या निर्णय लंबित है। उम्मीद है, अगर कोई मामला दर्ज किया गया है, तो अदालत द्वारा डिफ़ॉल्ट निर्णय जारी करने से पहले आपको पता चल जाएगा।

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झूठी गवाही देने पर कौन सी धारा लगती है?

क्या झूठी गवाही देना अपराध है ? भारतीय दंड संहिता की धारा 191 से 195 के तहत झूठी गवाही देना तथा सबूत के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज या तत्वों को परिवर्तित करना या नष्ट करना एक अपराध है।

Ladki अगर झूठा केस लगा तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि झूठा केस करने की धमकी देने वाली लड़की द्वारा झूठा केस फाइल किया जा सकता है, तो आप एक लॉयर हायर की हेल्प से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। अग्रिम जमानत आवेदन को उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय के समक्ष आवेदन करना होता है।

अगर कोई बच्चा मर्डर कर दे तो उसे क्या सजा मिलेगी?

पहले उपरोक्त उम्र के किशोर कोई अपराध करते थे तो उनके केसों की सुनवाई में ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक की सजा देने का प्रावधान रखा गया था, लेकिन अब जस्टिस जुवेनाइल एक्ट 2015 में संशोधन हो चुका है और नाबालिग अपराधी को उम्रकैद तक की सजा सुनाई जा सकेगी।

हाफ मर्डर क्या है?

आरोपी जानता था कि इस हमले से प्रार्थी मर सकता है। ज्ञात हो बस्तर में होने वाले इस तरह के जानलेवा हमलों के मामलों को आम ग्रामीण हाफ मर्डर के रूप में जानता है। ऐसे मामले शराब या अन्य किसी मादक पेय के सेवन से ही होते हैं।

क्या पुलिस गाली दे सकती है?

अगर कोई ऑफ़िसर अपनी पावर्स का गलत यूज़ करता है और किसी व्यक्ति को अपनी पावर के रौब में गाली देता है, जिसकी कोई जरूरत नहीं है, तो इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 197 के तहत सेंट्रल गवर्नमेंट से परमिशन लेकर इंटरफेयर किया जा सकता है। बल्कि जरूरत पड़ने पर उस पुलिस ऑफ़िसर के अगेंस्ट के सभी किया जा सकता है।

क्या पुलिस रात में गिरफ्तार कर सकती है?

24 घण्टे के बाद पुलिस आपको सिर्फ मजिस्ट्रेट की आज्ञा से हिरासत में रख सकती है। वह पुलिस अथवा न्यायिक अभिरक्षा की मांग कर सकते हैं।

क्या आप बिना वकील के कोर्ट जा सकते हैं?

यदि आपके पास कोई वकील (वकील या बैरिस्टर) नहीं है, तो आप अपना मामला खुद ले सकते हैं या अदालत में या न्यायाधिकरण में अपना बचाव कर सकते हैं । यदि आप कर सकते हैं तो उचित कानूनी सहायता प्राप्त करने का प्रयास करना महत्वपूर्ण है। यदि आपकी आय कम है, तो पता करें कि क्या आपको मुफ्त या सस्ती कानूनी सलाह मिल सकती है।

महिला पर हाथ उठाने पर कौन सी धारा लगती है?

महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामले जब भी कानूनी तौर पर दर्ज होते हैं. तो पुलिस अक्सर ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज करती है. आइए जानते हैं आईपीसी की धारा 354 के बारे में. भारतीय दंड संहिता की धारा 354 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है.

झूठा केस करने पर क्या होता है?

झूठी शिकायतें कर पुलिस और अदालत का समय और साधन बर्बाद करने वालों के लिए कानूनन सात साल के कारावास या आर्थिक दंड का प्रावधान है। -अलवर गेट TI सीआई हरिपाल सिंह ने बताया कि DIG डाॅ. नितिनदीप ब्लग्गन के आदेश से तफ्तीश में झूठे पाए गए 40 प्रकरणों में धारा 182 के तहत कार्रवाई के लिए अदालत में इस्तगासे पेश किए गए हैं।

झूठी गवाही के तीन 3 रूप क्या हैं?

संशोधित दंड संहिता झूठी गवाही को तीन रूपों में विभाजित करती है: पहला, एक आपराधिक मामले में झूठी गवाही (अनुच्छेद 180 और 181); दूसरा, दीवानी मामले में झूठी गवाही (अनुच्छेद 182); और तीसरा, अन्य मामलों में झूठी गवाही

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गवाह कितने प्रकार के होते हैं?

मौका (चांस) गवाह – कोई भी व्यक्ति जो संयोग से अपराध स्थल पर उपस्थित होता है। सहयोगी (एकांप्लिस) गवाह – कोई भी व्यक्ति जो अपराध के अवैध कमीशन या चूक से जुड़ा था, अदालत में बयान देता है। इच्छुक गवाह – कोई भी व्यक्ति जिसकी मामले में या उसके फैसले में कुछ भौतिक लाभ निकालने के लिए कुछ हित है।

धमकी देने पर कौन सी धारा लगती है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 506 यह स्पष्ट रूप से कहती है कि अगर धमकी जान से मारने की दी जा रही है तो ऐसा करना अपराध माना जाएगा. इस तरह की धमकी देने वाले व्यक्ति को 7 वर्ष तक की सजा भी हो सकती है.

महिला को मारने पर कौन सी धारा लगती है?

इंडियन पेनड कोड की धारा 498 ए शादीशुदा महिला के साथ ससुराल में क्रूरता के मामले में लगाई जाती है। दहेज उत्पीड़न और दहेज के लिए हत्याओं के मामलों को देखते हुए 1983 में आईपीसी में धारा 498ए शामिल की गई थी। ये एक गैरजमानती धारा है।

1 मर्डर करने पर कितने दिन की सजा होती है?

हत्या के आरोपी व्यक्तियों पर धारा 302 के तहत कोर्ट में मुकदमा चलाया जाता है। इसके अलावा, हत्या के मामले में आरोपी को दोषी पाए जाने पर धारा 302 के तहत सजा दी जाती है। धारा 302 के अनुसार आरोपी को या तो आजीवन कारावास या मृत्युदंड (हत्या की गंभीरता के आधार पर) के साथ – साथ जुर्माने की सजा दी जाती है।

मर्डर करने में कितने साल लगते हैं?

भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अनुसार, जो भी कोई किसी व्यक्ति की हत्या करता है, तो उसे मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा।

क्या पुलिस को गाली देने का अधिकार है?

अगर कोई पुलिस अधिकारी (भारत में) मुझे थप्पड़ मारता है और गालियां देता है तो मेरे अधिकार क्या हैं? जिस वक्त आपको थप्पड़ मार रहा है या मारने को उद्यत हो जाये तब आपकी आत्मरक्षा का कानूनी अधिकार है। गाली देते समय भी यह अधिकार है। यह आत्मरक्षा का अधिकार है।

महिला को कब गिरफ्तार नहीं कर सकते?

गौरतलब है कि सीआरपीसी की धारा 46(4) के तहत किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। वहीं, अगर महिला गंभीर अपराधी हो तो पुलिस (Police) लिखित अनुमति के साथ किसी महिला पुलिसकर्मी की मदद से महिला को गिरफ्तार कर सकती है।

भारत का सबसे बड़ा वकील कौन सा है?

देश के सबसे बड़े वकीलों में कमाई के लिहाज से पहला नंबर राम जेठमलानी का ही आता है। जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील और राजनीतिज्ञ हैं। 90 वर्षीय जेठमलानी इस उम्र में भी पूरी मजबूती के साथ इस मैदान में डटे हुए हैं। उन्हें क्रिमिनल और संवैधानिक नियम कानूनों की बहुत अच्छी जानकारी है।

एक वकील का वेतन कितना है?

payscale.com के अनुसार, भारत में एक सरकारी वकील को मिलने वाला सलाना औसत वेतन ₹445,861 है।

गाली देना कौन सी धारा लगती है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के अनुसार किसी के साथ गाली गलौज करना एक दंडनीय अपराध है।

कोई झूठा आरोप लगाए तो क्या करें?

दिल्‍ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली अधिवक्‍ता शुभम भारती ने बताया कि आईपीसी की धारा 482 के तहत झूठी एफआईआर को चैलेंज किया जा सकता है. अगर आपके खिलाफ या आपके जाननेवाले के खिलाफ कोई झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है तो धारा 482 के तहत उसे हाईकोर्ट से राहत मिल सकती है.

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छेड़छाड़ के केस में क्या होता है?

धारा 354 C में सजा का प्रावधान

अगर कोई व्यक्ति किसी भी स्त्री की ताक झांक करता है छुप छुप कर देखता है तो इस स्थिति में उस व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रावधान है। एवं जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है। यह अजमानती अपराध है।

गवाही देने वाले को क्या बोलते हैं?

वह गवाह जिसके सामने कोई घटना घटी हो, प्रत्यक्ष साक्षी, चाक्षुष साक्षी।।

गवाह शब्द का अर्थ क्या है?

वह मनुष्य जिसने किसी घटना को साक्षात् देखा हो । वह जिसके सामने कोई बात हुई हो । २. वह जो किसी मामले के विषय में जानकारी रखता हो ।

झूठी गवाही देने पर क्या होता है?

और जानबूझकर देता है या किसी भी अन्य मामले में झूठी गवाही fabricates जो कोई भी तीन साल तक का हो सकता है, और भी ठीक करने के लिए उत्तरदायी होगा जो एक अवधि के लिए या तो विवरण के कारावास का दंड दिया जाएगा.

झूठी गवाही देने में कौन सी धारा लगती है?

नई प्रक्रिया धारा 340 के तहत कार्रवाई करने के लिए पूर्वाग्रह के बिना किया जाएगा. प्र. 7. खंड के तहत लगाया वाक्य गवाह मिथ्या शपथ का अपराधी सबूत दिया और सजा सुनाई गई थी जिसमें मुख्य कार्यवाही में निर्णय या आदेश के खिलाफ अपील या पुनरीक्षण के निपटान तक निष्पादित नहीं किया जाना चाहिए.

फोन पर गाली देने पर कौन सी धारा लगती है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के अनुसार किसी के साथ गाली गलौज करना एक दंडनीय अपराध है। इस धारा के अंतर्गत किसी व्यक्ति को गाली देने पर करीब तीन महीने तक की सजा हो सकती है।

झूठ बोलने की कौन सी धारा लगती है?

कानून में सजा का प्रावधान

एडवोकेट सुनील आनंद ने बताया कि झूठ बोलने वाले शख्स को पहले सीआरपीसी की धारा-344 के तहत नोटिस जारी किया जाता है। फिर उस पर सुनवाई होती है। झूठ साबित होने पर उसे 6 महीने की कैद व 500 से 1000 रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।

हाफ मर्डर करने पर कितने साल की सजा है?

हत्या के आरोपी व्यक्तियों पर धारा 302 के तहत कोर्ट में मुकदमा चलाया जाता है। इसके अलावा, हत्या के मामले में आरोपी को दोषी पाए जाने पर धारा 302 के तहत सजा दी जाती है। धारा 302 के अनुसार आरोपी को या तो आजीवन कारावास या मृत्युदंड (हत्या की गंभीरता के आधार पर) के साथ – साथ जुर्माने की सजा दी जाती है।

अगर कोई मारने की धमकी दे तो क्या करना चाहिए?

अगर कोई देता है जान से मारने की धमकी

आप धमकी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा सकती हैं। इसके बाद मजिस्ट्रेट को इस मामले की कॉपी दी जाती है और फिर धमकी देने वाले व्यक्ति के ऊपर मुकदमा चलाया जाता है।

पुलिस में सबसे बड़ा कौन होता है?

Police Ka Sabse Bada Adhikari Kaun Hota Hai

भारत में, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एक तीन सितारा रैंक है और भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उच्चतम रैंकिंग पुलिस अधिकारी है। सभी डीजीपी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं।