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छायावादी कवि कौन कौन है?

छायावाद हिंदी साहित्य के रोमांटिक उत्थान की वह काव्य-धारा है जो लगभग ई. स. 1918 से 1936 तक की प्रमुख युगवाणी रही। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, पंडित माखन लाल चतुर्वेदी इस काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं।

छायावाद के जनक कौन है?

जयशंकर प्रसाद ने हिंदी काव्य में छायावाद की स्थापना की जिसके द्वारा खड़ी बोली के काव्य में कमनीय माधुर्य की रससिद्ध धारा प्रवाहित हुई और वह काव्य की सिद्ध भाषा बन गई।

छायावादी युग का दूसरा नाम क्या है?

छायावादी युग (1920-1936) प्राय: 'द्विवेदी युग' के बाद के समय को कहा जाता है। बीसवीं सदी का पूर्वार्द्ध छायावादी कवियों का उत्थान काल था। इस युग को जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और सुमित्रानंदन पंत जैसे छायावादी प्रकृति उपासक-सौन्दर्य पूजक कवियों का युग कहा जाता है।

छायावादी कवि कौन से नहीं है?

Detailed Solution. शिवमंगल सिंह सुमन छायावादी कवि नहीं है।

छायावाद के प्रथम कवि कौन है?

1. जयशंकर प्रसाद छायावादी काव्य के प्रवर्तक कवियों में प्रसाद जी का स्थान मूर्धन्य है। जयशंकर प्रसाद का जन्म 1889 ई.

छायावादी का अर्थ क्या होता है?

हिन्दी साहित्य के आधुनिक चरण मे द्विवेदी युग के पश्चात हिन्दी काव्य की जो धारा विषय वस्तु की दृष्टि से स्वच्छंद प्रेमभावना, पकृति मे मानवीय क्रिया कलापों तथा भाव-व्यापारों के आरोपण और कला की दृष्टि से लाक्षणिकता प्रधान नवीन अभिव्यंजना-पद्धति को लेकर चली, उसे छायावाद कहा गया।

द्विवेदी युग के कवि कौन है?

द्विवेदी युग के प्रमुख कवि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिली शरण गुप्त, पं. रामचरित उपाध्याय, पं. लोचन प्रसाद पांडेय, राय देवी प्रसाद ‘पूर्ण’, पं. नाथू राम शर्मा, पं.

भारत के राष्ट्रीय कवि कौन है?

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (३ अगस्त १८८६ – १२ दिसम्बर १९६४) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे।

छायावाद का क्या मतलब है?

हिन्दी साहित्य के आधुनिक चरण मे द्विवेदी युग के पश्चात हिन्दी काव्य की जो धारा विषय वस्तु की दृष्टि से स्वच्छंद प्रेमभावना, पकृति मे मानवीय क्रिया कलापों तथा भाव-व्यापारों के आरोपण और कला की दृष्टि से लाक्षणिकता प्रधान नवीन अभिव्यंजना-पद्धति को लेकर चली, उसे छायावाद कहा गया।

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वह तोड़ती पत्थर के रचयिता कौन है?

वह तोड़ती पत्थर‘ प्रसिद्ध छायावादी कवि सूर्य कान्त त्रिपाठी ‘ निराला ‘ द्वारा रचित है। निराला जी अपनी रचनाओं में जीवन के मार्मिक दृश्य को उजागर करते है। कवि कहते है, मैने एक महिला को पत्थर तोड़ते हुए देखा। कवि इलाहाबाद के किसी रास्ते पर उस महिला को पत्थर तोड़ते हुए देखते है।

छायावाद किसकी किताब है?

छायावाद के नामकरण का श्रेय ‘मुकुटधर पांडेय’ को दिया जाता है। इन्होंने सर्वप्रथम 1920 ई में जबलपुर से प्रकाशित श्रीशारदा (जबलपुर) पत्रिका में ‘हिंदी में छायावाद‘ नामक चार निबंधों की एक लेखमाला प्रकाशित करवाई थी। मुकुटधर पांडेय जी द्वारा रचित कविता “कुररी के प्रति” छायावाद की प्रथम कविता मानी जाती है ।

द्विवेदी युग का दूसरा नाम क्या है?

नामकरण आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर ही यह काल ‘द्विवेदी युग‘ के नाम से जाना जाता है। इसे ‘जागरण-सुधारकाल’ भी कहा जाता है।

भारत में सबसे अच्छा कवि कौन था?

सरोजिनी नायडू (1879-1949), प्रख्यात कवि, स्वतंत्रता सेनानी और अंग्रेजी में प्रशासक लेखन। शहजाद ए. रिजवी (जन्म 1937, ग्वालियर), अंग्रेजी और उर्दू में लेखक, विद्वान और कवि लेखन। शिव कुमार, कवि, नाटककार, उपन्यासकार, लघुकथाकार।

छायावाद की दो विशेषता क्या है?

ध्वन्यात्मकता, लाक्षणिकता सौंदर्यमय प्रतीक विधान तथा उपचार वक्रता के साथ स्वानुभूति की विवृत्ति छायावाद की विशेषताएं हैं।”

नारी कहाँ पत्थर तोड़ रही है?

प्रश्न 1. नारी कहाँ पत्थर तोड़ती थी? उत्तर: नारी इलाहाबाद के पथ पर पत्थर तोड़ती थी

नारी कहाँ पत्थर तोड़ती थी नारी इलाहाबाद के पथ पर पत्थर तोड़ती थी?

उत्तर: इलाहाबाद के पथ पर वह महिला पत्थर तोड़ती थी। वहाँ कोई छायादार पेड़ नहीं था, जहाँ वह बैठ सके। उसका तन साँवला था, पर वह भरे यौवन में थी

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छायावाद नाम क्यों पड़ा?

पर इतिवृत्तात्मक अभिव्यक्ति को पीछे छोड़ते हुए जब स्वानुभूति को प्रतीक और बिन्बों के सहारे खड़ा किया गया तब इसे छायावाद की संज्ञा दी गई। मुख्यतः प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा आदि के रचित काव्य के सहारे टिकी इस नवीनता को यह नाम मुकुटधर पाण्डेय ने दिया था। इसका काल 1918 से 1936 माना जाता है।

द्विवेदी का मतलब क्या होता है?

– 1. दो वेदों का ज्ञाता 2. ब्राह्मणों में एक कुलनाम या सरनेम।

सरस्वती पत्रिका के संपादक कौन है?

हिंदी साहित्य की तस्वीर बनी सरस्वती पत्रिका

ब्रिटिश हुकूमत में इंडियन प्रेस के संस्थापक बाबू चिंतामणि घोष ने सन 1900 में सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन आरंभ कराया था। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने जनवरी 1903 से दिसंबर 1920 तक इसका संपादन किया। यह पत्रिका का स्वर्णिम काल था।

भारत का नंबर वन कवि कौन है?

सही उत्‍तर है → वाल्मीकि। वाल्मीकि पहली संस्कृत कविता के रचनाकार थे जिन्हें दुनिया भर में महाकाव्य रामायण के रूप में जाना जाता है। इसलिए उन्हें आदिकवि या भारत का पहला कवि कहा जाता है।

धरती का कवि कौन है?

प्रगतिवादी कवि त्रिलोचन ने काव्य को जीवन की वास्तविकता से जोड़कर कविता को सर्वग्राह्य एवं व्यापक बनाने में अतुलनीय योग दिया है। उनका काव्य सैद्धांतिकता से दूर मानवीय जीवन की वास्तविक अनुभूतियों का चित्राण करता है।

दुनिया के पहले कवि कौन थे?

हिन्दी के प्रथम कवि सरहपा हैं। अत: सही उत्तर विकल्प 3 सरहपा है। हिन्दी के प्रथम कवि— सरहपा। राहुल सांकृत्यायन ने हिंदी का प्रथम कवि जैन साहित्य के रचयिता सरहपा को माना है जिनका जन्मकाल 8वीं शदी माना जाता है ।

भारत के पहले कवि कौन थे?

सही उत्‍तर है → वाल्मीकि। वाल्मीकि पहली संस्कृत कविता के रचनाकार थे जिन्हें दुनिया भर में महाकाव्य रामायण के रूप में जाना जाता है। इसलिए उन्हें आदिकवि या भारत का पहला कवि कहा जाता है।

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छायावाद का नाम ऐसा क्यों पड़ा?

स्वच्छन्दता की उस सामान्य भाव-धारा की विशेष अभिव्यक्ति का नाम हिन्दी साहित्य में छायावाद पड़ा। पर कुछ टीका-टिप्पणी हो चुकी थी । उस युग की प्रतिनिधि पत्रिका ‘सरस्वती’ में ‘छायावाद‘ का प्रथम उल्लेख जून, १९२१ ई० के अंक में मिलता है। किन्हीं सुशील कुमार ने ‘हिन्दी में छायावाद‘ शीर्षक एक संवादात्मक निबन्ध लिखा है।

पत्थर तोडती स्त्री के सामने क्या था?

कवि इलाहाबाद के जनपथ पर भीषण गर्मी में पत्थर तोड़ती मजदूरनी को देखता है। वह बिना छायावाले एक पेड़ के नीचे पत्थर तोड़ने का कार्य कर रही थी। उसके सामने वृक्षों के समूह और विशाल अट्टालिकाएँ और प्राचीर थे। तेज और तीखी धूप से धरती रूई की तरह जल रही थी।

वह तोड़ती पत्थर का भाव सौंदर्य क्या है?

उत्तर- ‘तोड़ती पत्थर‘ कविता प्रगतिवादी विचारधारा की कविता है जिसमें एक श्रमिक महिला की दयनीय स्थिति को बताया है। – सरल-सहज भाषा का प्रयोग किया है। – खड़ी बोली की सशक्त अभिव्यक्ति है। – अनुप्रास की छटा दर्शनीय है-नत-नमन, ज्यों जलदी, देखते देखा, सजा सहज सितार।

कवि ने नीचे झुककर क्या देखा?

जैसे ही कवि ने झुककर नीचे की ओर देखा तो उन्हें वहाँ पर शिवजी के ऊपर चावल, तिल और जल चढ़ाते हुए एक ब्राह्मण दिखलायी दिया तत्पश्चात् वह ब्राह्मण एक झोली लेकर ऊपर आया। बन्दर उसे देखकर वहाँ आ गये। उसने बन्दरों को झोली से निकालकर पुए दे दिये और उसे भिखारी की ओर मुड़कर भी नहीं देखा। यह देखकर कवि को दुःख हुआ।

नारी कब पत्थर तोड़ रही थी?

नारी कब पत्थर तोड़ रही थी? उत्तर: नारी दुपहर की धूप में पत्थर तोड़ रही थी। प्रश्न 5.